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अधूरा सच (कविता)

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निर्भया कांड की याद दिला रही है यह घटना..

मानव सभी जीवों में श्रेष्ठ माना जाता है, परंतु उसकी बढ़ती संवेदनहीनता मानवता के लिए अभिशाप बनती जा रही है। उ.प्र. के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र अन्तर्गत ज्ञानखेड़ा गांव में हुई गोविंद विश्वकर्मा की हत्या के मामले में वांछित आरोपी की गिरफ्तारी के लिए नेशनल नीड पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविन्द विश्वकर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल ने शनिवार को अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन से मिलकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के बाद अरविन्द विश्वकर्मा ने बताया कि बीते 20 अगस्त को ज्ञानखेड़ा गांव में गोविन्द विश्वकर्मा की नृशंस हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने गोविन्द की आंख निकाल ली, गुप्तांग काट दिया। यह हत्या निर्भया काण्ड की याद दिला रही है जो कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा है। उन्होंने बताया कि चार हत्यारों में तीन की गिरफ्तारी तो हो गई परन्तु एक नामजद जो पेशेवर अपराधी है की गिरफ्तारी में स्थानीय पुलिस हीलाहवाली कर रही है। यही कारण है कि वांछित की गिरफ्तारी के लिये अपर पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपना पड़ा।  अरविंद विश्वकर्मा ने बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ से ...

छात्रा को जिन्दा जलाने पर विश्वकर्मा समाज में आक्रोश, आज़ाद मैदान में दिया धरना

मुम्बई:  उ.प्र. के प्रतापगढ़ जिले के श्रीपुर गाँव में दबंगों द्वारा बी.ए. की  छात्रा ज्योति विश्वकर्मा को ज़िंदा जला दिए जाने की घटना से आक्रोषित विश्वकर्मा समाज ने सोमवार, २६ अक्टूबर २०१५ को आज़ाद मैदान में धरना प्रदर्शन कर दोषियों पर कड़ी कारवाई की मांग करते हुए पीड़ित परिवार को उचित मुआवज़ा देने की मांग की है। सर्व विश्वकर्मा समाज संस्था की ओर से आयोजित इस धरने के संयोजक शिवलाल सुतार ने बताया कि गत 25 सितम्बर को गाँव के कुछ दबंगों ने ज्योति पर मिट्टी का तेल डालकर ज़िंदा जला दिया था, जिसने बाद में इलाहाबाद के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। यदि पुलिस व प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया होता, तो शायद ज्योति की जान बच सकती थी।  ऐसी घटनाएँ दुबारा न हो, इसके लिए हम सबको कमर कसनी होगी। इस घटना के विरोध में महाराष्ट्र के कोने-कोने से विश्वकर्मा वंशीय इकट्ठा हुए।  मुंबई में  भारी  संख्या में औरतों ने भी इस प्रदर्शन में  इसमें भाग लिया।  विश्वकर्मा समाज की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने धरने में शामिल होकर दोषियों को कठोर...

अच्छाई पर बुराई की विजयादशमी..!!

विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत, अनैतिकता पर नैतिकता की विजय, इसी रूप में इस पर्व को देखा जाता है। आज पूरे देश में हर्षोल्लास का वातावरण रहा। लोगों ने एक दूसरे को दशहरे की शुभकामनायें दीं, घर के द्वार पर तोरण आदि बांधे। अपने खून-पसीने की कमाई से लाये गए वाहनों का अभिषेक किया व फूलों की मालाएँ चढ़ाकर उनकी पूजा-अर्चना की। घर में तरह-तरह के पकवान बने, जिसका सभी ने अवश्य आनंद उठाया। आज सभी ने पूरे मन से इस त्यौहार को मनाया । बुराई पर अच्छाई की जीत! बड़ा आश्चर्य होता है, इस बारे में सोचकर व आज की परिस्थिति देखकर। यह बात सतयुग के लिए ही शोभनीय है, आज कलियुग में ऐसी आशा करना भी मूर्खता है। मानव में आज मानवता छोड़कर अन्य हर भाव दृश्यमान हो रहे हैं। हर एक व्यक्ति खुद को शक्तिशाली दिखाने की होड़ में लगा हुआ है। गरीब व असहाय, उच्च वर्ग के हर तबके द्वारा सताए जा रहे हैं। धर्म-जाति के नाम पर गृह युद्ध विराम लेने का कोई संकेत नहीं दे रहा। लोग अपने स्वार्थ हेतु किसी भी श्रेणी तक जाने को तैयार हैं। मध्यम वर्ग, जो अपनी सभ्य संस्कृति व ईमानदारी की मिसाल बना हुआ था, आज उसके कदम भी लड़खड़ा रहे हैं।...